कर्मण्येवाधिकारस्ते श्लोक का सही अर्थ क्या है
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
गीता 2.47 — (1) कर्म करना तुम्हारे हाथ में है (2) फल तुम्हारे नियंत्रण में नहीं (3) फल की लालसा कर्म का कारण न बने (4) 'फल नहीं तो कर्म क्यों' — यह सोच भी गलत। सार: पूर्ण समर्पण से कर्म करो, परिणाम ईश्वर पर छोड़ो।
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