मंदिर में संध्या आरती और प्रातः आरती में क्या अंतर है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
प्रातः: जागरण भाव — देवता को जगाना (सुप्रभात), शांत-सात्विक, ब्रह्ममुहूर्त। संध्या: कृतज्ञता + रक्षा — अंधकार निवारण, भावनात्मक-भक्तिपूर्ण, सूर्यास्त। प्रातः = दिन शुभारम्भ, संध्या = दिन समापन + रात्रि रक्षा प्रार्थना। अन्य: मध्याह्न (राजभोग), शयन।
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