प्रातः: जागरण भाव — देवता को जगाना (सुप्रभात), शांत-सात्विक, ब्रह्ममुहूर्त। संध्या: कृतज्ञता + रक्षा — अंधकार निवारण, भावनात्मक-भक्तिपूर्ण, सूर्यास्त। प्रातः = दिन शुभारम्भ, संध्या = दिन समापन + रात्रि रक्षा प्रार्थना। अन्य: मध्याह्न (राजभोग), शयन।
- 1शंख ध्वनि/घंटा नाद से प्रारम्भ
- 2देवता का 'उत्थान' (जागरण) — 'जय जगदीश हरे' या देवता-विशिष्ट प्रातः स्तुति
- 3सुप्रभात गीत/मंत्र ('कौसल्या सुप्रजा राम' — विष्णु/राम)
- 4दीप + कर्पूर आरती
- 5भोग (प्रातः भोग — दूध, मिठाई)
- 6शंख ध्वनि/घंटा नाद
- 7दीपक जलाना (अंधकार निवारण) — पंचारति या कर्पूर
- 8'ॐ जय जगदीश हरे' या देवता-विशिष्ट संध्या आरती
- 9संध्यावंदन मंत्र
- 10भोग (संध्या भोग — फल, मिठाई)
- 11मध्याह्न आरती (राजभोग): दोपहर — भोग अर्पण के साथ
- 12शयन आरती: रात्रि — देवता को शयन हेतु विदा
- 13श्रृंगार आरती: विशेष अलंकरण के बाद