मंत्र जप में कुशा का आसन क्यों उत्तम माना जाता है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
गीता (6.11): कृष्ण ने स्वयं कुशा आसन विधान बताया ('कुशोत्तरम्')। 'कु=पाप, श=शमन — कुश=पाप नाशक।' ब्रह्माण्ड पुराण: कलियुग में सबसे पवित्र, अनंत गुना फल। वैज्ञानिक: विद्युत कुचालक — ऊर्जा संरक्षण। त्रिदेव: जड़=ब्रह्मा, मध्य=विष्णु, शीर्ष=शिव। विकल्प: ऊनी कंबल।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
मंत्र विधि
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।