मंत्र जप में मृगचर्म आसन का क्या विशेष लाभ है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
गीता: 'चैलाजिनकुशोत्तरम्' (कुश+मृगचर्म+वस्त्र)। ऊर्जा insulate, योगिक परंपरा, शांत ऊर्जा, कुंडलिनी। आधुनिक: अहिंसा → विकल्प: ऊनी/कुश/रेशम।
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