मंत्र जप में श्रद्धा और विश्वास का कितना महत्व है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
श्रद्धा = मंत्र की आत्मा। गीता: 'श्रद्धावान् लभते ज्ञानम्', 'संशयात्मा विनश्यति'। पतंजलि: श्रद्धा → वीर्य → स्मृति → समाधि (श्रद्धा प्रथम)। श्रद्धा = 90%, विधि = 10%। बिना श्रद्धा = तोते का रटना। 'भक्तिहीनं...परिपूर्णं तदस्तु मे'।
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