मंत्र सिद्धि में गुरु की क्या भूमिका होती है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
कुलार्णव: बिना दीक्षा मंत्र = मृत शिशु। गुरु की पाँच भूमिकाएं: मंत्र-चयन, दीक्षा (शक्तिपात), सही उच्चारण, साधना-मार्गदर्शन, शक्ति-संचरण। तीन प्रकार: शिक्षा, दीक्षा, और निष्पत्ति गुरु। जब साधक तैयार होता है — गुरु स्वयं प्रकट होते हैं।
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