मंत्र सिद्धि में गुरु की क्या भूमिका होती है?
की चेकलिस्ट
कुलार्णव: बिना दीक्षा मंत्र = मृत शिशु। गुरु की पाँच भूमिकाएं: मंत्र-चयन, दीक्षा (शक्तिपात), सही उच्चारण, साधना-मार्गदर्शन, शक्ति-संचरण। तीन प्रकार: शिक्षा, दीक्षा, और निष्पत्ति गुरु। जब साधक तैयार होता है — गुरु स्वयं प्रकट होते हैं।
- 1शिक्षा गुरु — ज्ञान देने वाले
- 2दीक्षा गुरु — मंत्र और दीक्षा देने वाले (यही मंत्र-सिद्धि के लिए चाहिए)
- 3निष्पत्ति गुरु — सिद्धि तक पहुँचाने वाले (सर्वोच्च)
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श्रेणी
मंत्र सिद्धि
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