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सरल उत्तर

मंत्र उच्चारण शुद्धि कितनी महत्वपूर्ण है जप में?

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शिक्षा वेदांग: 'स्वर/वर्ण दोषयुक्त = वज्र समान हानि।' वैदिक/तांत्रिक = शुद्धि अत्यावश्यक। नाम जप/चालीसा = भाव > उच्चारण। 'मन्त्रहीनं...परिपूर्णं तदस्तु मे' — भक्ति से कमी पूर्ण। गुरु से सीखें + भक्ति = सर्वोत्तम।

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