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सरल उत्तर

पूजा में शुद्धता क्यों जरूरी है?

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पूजा में शुद्धता क्यों: तैत्तिरीय उपनिषद — 'अशुद्ध स्थान में देवता नहीं रहते।' दो शुद्धि: बाह्य (स्नान-वस्त्र) और आंतरिक (मन से काम-क्रोध हटाना)। स्नान संभव न हो तो आचमन + हाथ-पैर धोना पर्याप्त। मन-वचन-कर्म तीनों की शुद्धि आवश्यक।

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