पुरश्चरण के दौरान तर्पण क्यों किया जाता है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
मनुस्मृति: तीन ऋण — देव (हवन), ऋषि (तर्पण-स्वाध्याय), पितृ (तर्पण-श्राद्ध)। पुरश्चरण में तर्पण: देवता-तृप्ति, ऋषि-ऋण मुक्ति, पितृ-तृप्ति (पितृ-विघ्न दूर), हवन-दोष निवारण। तर्पण विधि: देव (तीर्थ), ऋषि (किनारे), पितृ (अंगूठे से)। संख्या = हवन का 10वाँ।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
पुरश्चरण
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।