ऋग्वेद में विष्णु को 'त्रिविक्रम' क्यों कहते हैं?
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सरल उत्तर
त्रिविक्रम = तीन पगों से ब्रह्मांड नापने वाले। तीन पद = आकाश, अंतरिक्ष और पृथ्वी में सर्वव्यापी प्रभाव। सूर्य की तीन अवस्थाएं (उदय, मध्य, अस्त) भी। आध्यात्मिक अर्थ: जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति पार कर 'तुरीय' (परम चेतना) में प्रवेश।
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