सीताजी ने श्रीरामजी को पहली बार देखकर क्या अनुभव किया?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
नारदजी के वचन स्मरण कर मन में पवित्र प्रीति जागी — 'जनु सिसु मृगी सभीत' — डरी हुई मृगछौनी की तरह चकित होकर चारों ओर देखने लगीं। दर्शन के लिये नेत्र अकुला उठे। जन्म-जन्मान्तर का प्रेम जाग उठा।
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रामचरितमानस — बालकाण्ड
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