तंत्र साधना में साधक की क्या भूमिका होती है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
साधक की भूमिका: कुलार्णव — तीन भाव: पशु (प्रारंभिक), वीर (मध्यम), दिव्य (उन्नत)। छह गुण: श्रद्धा, नित्यता, गोपनीयता, निर्भयता, शुद्ध उद्देश्य, समर्पण। तंत्रालोक: 'साधकः शिवः' — साधक स्वयं शिव है।
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साधक की भूमिका
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