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सरल उत्तर

उपनिषद में गुरु-शिष्य परंपरा क्या है?

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उपनिषद स्वयं गुरु-शिष्य संवाद हैं — यमराज-नचिकेता, उद्दालक-श्वेतकेतु, याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी। गुरु — श्रोत्रिय और ब्रह्मनिष्ठ होना चाहिए (मुण्डकोपनिषद 1/2/12)। शिष्य — श्रद्धा, जिज्ञासा और ब्रह्मचर्य से युक्त। ज्ञान श्रवण-मनन-निदिध्यासन से मिलता है।

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