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तालिका

तंत्र साधना कब करनी चाहिए?

की तालिका

तंत्र साधना के लिए ब्रह्ममुहूर्त (सात्विक तंत्र), प्रदोष काल (शिव-शक्ति) और मध्यरात्रि (उग्र तंत्र) शुभ हैं। अमावस्या तांत्रिक साधना की प्रमुख तिथि है। नवरात्रि और दीपावली वार्षिक महाकाल हैं। ग्रहण काल केवल सिद्ध तांत्रिकों के लिए है।

क्या करेंक्या न करें
ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-6 बजे):सूतक-पातक में साधना न करें
सात्विक तंत्र साधना के लिए सर्वश्रेष्ठश्राद्ध पक्ष में उच्च तंत्र साधना न करें
गायत्री, लक्ष्मी, सरस्वती, विष्णु साधना।अत्यंत बीमारी, शोक और मानसिक अस्थिरता में साधना बंद रखें
प्रदोष काल (सूर्यास्त के 1.5 घंटे बाद):—
शिव-शक्ति साधना के लिए उत्तम।—
निशीथ काल (मध्यरात्रि — रात 11:30 से 12:30):—
तांत्रिक साधना के लिए सर्वोत्तम—
काली, भैरव, दस महाविद्या साधना—
> महानिर्वाण तंत्र: 'निशीथे च महाशक्तिः पूजयेद् भक्तिमान् नरः।'—
चतुर्थ प्रहर (प्रातः 3-6 बजे):—
देवताओं का जागृत काल—
साधना के लिए अत्यंत शुभ।—
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