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अर्थ

आत्मज्ञान का अर्थ(1)

आत्मज्ञान का अर्थआत्मज्ञान क्या है?आत्मज्ञान का महत्व
सरल उत्तर

अहं ब्रह्मास्मि = 'मैं ब्रह्म हूँ।' बृहदारण्यक उपनिषद (1.4.10)। यह अहंकार नहीं, आत्मज्ञान का उद्घोष है — शुद्ध चैतन्य (शरीर-मन से परे) ही ब्रह्म है। लहर = समुद्र, कंगन = सोना। इस अनुभव को प्राप्त करना ही मोक्ष।

स्रोत प्रश्न: अहं ब्रह्मास्मि का अर्थ क्या है? →
दर्शन

अहं ब्रह्मास्मि का अर्थ क्या है?

अहं ब्रह्मास्मि = 'मैं ब्रह्म हूँ।' बृहदारण्यक उपनिषद (1.4.10)। यह अहंकार नहीं, आत्मज्ञान का उद्घोष है — शुद्ध चैतन्य (शरीर-मन से परे) ही ब्रह्म है। लहर = समुद्र, कंगन = सोना। इस अनुभव को प्राप्त करना ही मोक्ष।

#अहं ब्रह्मास्मि#महावाक्य#बृहदारण्यक उपनिषद
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