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क्या है

आत्मज्ञान क्या है?(11)

आत्मज्ञान का अर्थआत्मज्ञान क्या है?आत्मज्ञान का महत्व
सरल उत्तर

ज्ञान योग = आत्मा-ब्रह्म के यथार्थ बोध से मोक्ष। विचारकों के लिए। स्थितप्रज्ञ अवस्था — कामना-भय-क्रोध से मुक्त। क्षेत्र (शरीर) और क्षेत्रज्ञ (आत्मा) का विवेक (अध्याय 13)। 'सर्वकर्म ज्ञान में परिसमाप्त होते हैं' (4)। समदर्शिता — सभी में ईश्वर दर्शन।

स्रोत प्रश्न: गीता में ज्ञान योग क्या है? →
भगवद गीता

गीता में ज्ञान योग क्या है?

ज्ञान योग = आत्मा-ब्रह्म के यथार्थ बोध से मोक्ष। विचारकों के लिए। स्थितप्रज्ञ अवस्था — कामना-भय-क्रोध से मुक्त। क्षेत्र (शरीर) और क्षेत्रज्ञ (आत्मा) का विवेक (अध्याय 13)। 'सर्वकर्म ज्ञान में परिसमाप्त होते हैं' (4)। समदर्शिता — सभी में ईश्वर दर्शन।

#ज्ञान योग#गीता#आत्मज्ञान
दर्शन

अहं ब्रह्मास्मि का अर्थ क्या है?

अहं ब्रह्मास्मि = 'मैं ब्रह्म हूँ।' बृहदारण्यक उपनिषद (1.4.10)। यह अहंकार नहीं, आत्मज्ञान का उद्घोष है — शुद्ध चैतन्य (शरीर-मन से परे) ही ब्रह्म है। लहर = समुद्र, कंगन = सोना। इस अनुभव को प्राप्त करना ही मोक्ष।

#अहं ब्रह्मास्मि#महावाक्य#बृहदारण्यक उपनिषद
योग बाधाएँ

भ्रान्तिदर्शन क्या होता है?

समाधि के समीप पहुँचकर अज्ञान के कारण अनात्म पदार्थों में आत्मज्ञान रूप विपरीत ज्ञान रखना भ्रान्तिदर्शन है।

#भ्रान्तिदर्शन#विपरीत ज्ञान#अनात्म
शौच और नियम

योग में शुद्धि का सही अर्थ क्या है?

योग में शुद्धि बाह्य और आंतरिक दोनों है, पर आंतरिक शुचिता श्रेष्ठ बताई गई है।

#शुद्धि#शौच#आंतरिक शुचिता
लोक

परमहंस अवस्था क्या है

परमहंस अवस्था आत्मज्ञान और पूर्ण वैराग्य की सर्वोच्च स्थिति है।

#परमहंस#हंस अवतार#आत्मज्ञान
लोक

हृदय ग्रंथि क्या है

हृदय ग्रंथि अहंकार और ममता की अज्ञान-जनित गाँठ है।

#हृदय ग्रंथि#अहंकार#माया
लोक

हंस अवतार में हंस का प्रतीक क्या है

हंस शुद्धता, विवेक और परमहंस आत्मज्ञान का प्रतीक है।

#हंस प्रतीक#विवेक#परमहंस
लोक

हंस अवतार ने आप कौन हैं प्रश्न का क्या उत्तर दिया

भगवान हंस ने कहा कि आत्मा के स्तर पर मैं और तुम का भेद मिथ्या है।

#आप कौन हैं#हंस गीता#अद्वैत
लोक

हंस गीता क्या है

हंस गीता भगवान हंस द्वारा दिया गया आत्मज्ञान और मोक्षधर्म का उपदेश है।

#हंस गीता#हंस अवतार#आत्मज्ञान
सनातन सिद्धांत

हिंदू धर्म में ज्ञान क्या है?

हिंदू धर्म में ज्ञान दो प्रकार का है — परा विद्या (ब्रह्म-ज्ञान) और अपरा विद्या (शास्त्रीय ज्ञान)। गीता (4/38) के अनुसार ज्ञान सबसे बड़ा पवित्रकर्ता है; आत्मा और ब्रह्म की एकता का साक्षात्कार ही परम ज्ञान है।

#ज्ञान#अपरा विद्या#परा विद्या
सनातन सिद्धांत

आध्यात्मिक ज्ञान क्या है?

आध्यात्मिक ज्ञान वह 'परा विद्या' है जो आत्मा-परमात्मा के सत्य स्वरूप का बोध कराती है। मुण्डकोपनिषद के अनुसार यह लौकिक विद्याओं से श्रेष्ठ है। श्रवण, मनन और निदिध्यासन इसके तीन मार्ग हैं।

#आध्यात्मिक ज्ञान#आत्मज्ञान#ब्रह्मज्ञान
और क्या है
अन्य शब्दों के क्या है

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