विस्तृत उत्तर
हंस गीता भगवान हंस के द्वारा दिया गया आत्मज्ञान का दिव्य उपदेश है। श्रीमद्भागवत में यह संवाद तब होता है जब सनकादिक मुनि ब्रह्मा जी से मन और विषयों के बंधन से मुक्त होने का उपाय पूछते हैं। ब्रह्मा जी भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं, और भगवान हंस रूप में प्रकट होकर बताते हैं कि आत्मा मन, शरीर और इंद्रियों से भिन्न है। वे जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय अवस्थाओं का रहस्य बताते हैं। महाभारत शांति पर्व में भी हंस गीता मोक्षधर्म, सत्य, क्षमा और आत्मसंयम के उपदेश के रूप में मिलती है।
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