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अर्थ

आत्मा का अर्थ(3)

आत्मा का अर्थआत्मा क्या है?आत्मा का महत्व
सरल उत्तर

भगवान का स्थूल जगदाकार रूप उनकी माया के महत्तत्त्व आदि गुणों से उनमें कल्पित बताया गया है; वह उनका वास्तविक प्राकृत रूप नहीं है।

स्रोत प्रश्न: भगवान के स्थूल रूप का मतलब क्या है? →
श्रीमद्भागवत

भगवान के स्थूल रूप का मतलब क्या है?

भगवान का स्थूल जगदाकार रूप उनकी माया के महत्तत्त्व आदि गुणों से उनमें कल्पित बताया गया है; वह उनका वास्तविक प्राकृत रूप नहीं है।

#स्थूल रूप#जगदाकार रूप#माया
हिंदू दर्शन

वासांसि जीर्णानि श्लोक का अर्थ क्या है

गीता 2.22 — जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र बदलकर नए पहनता है, वैसे ही आत्मा पुराना शरीर छोड़कर नया धारण करती है। तात्पर्य: मृत्यु = वस्त्र बदलना; शरीर नाशवान, आत्मा शाश्वत। मृत्यु का भय अज्ञानता है।

#गीता#वासांसि जीर्णानि#आत्मा
हिंदू दर्शन

सच्चिदानंद का अर्थ क्या है

सच्चिदानंद = सत् (शाश्वत अस्तित्व) + चित् (शुद्ध चेतना/ज्ञान) + आनंद (परम सुख)। यह ब्रह्म और आत्मा का स्वरूप है। तैत्तिरीय उपनिषद — 'सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म'। सरल अर्थ: मैं हूं + मैं जानता हूं + मैं आनंदित हूं = आत्मा का मूल स्वभाव।

#सच्चिदानंद#ब्रह्म#वेदांत
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