हिंदू दर्शनवासांसि जीर्णानि श्लोक का अर्थ क्या हैगीता 2.22 — जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र बदलकर नए पहनता है, वैसे ही आत्मा पुराना शरीर छोड़कर नया धारण करती है। तात्पर्य: मृत्यु = वस्त्र बदलना; शरीर नाशवान, आत्मा शाश्वत। मृत्यु का भय अज्ञानता है।#गीता#वासांसि जीर्णानि#आत्मा
हिंदू दर्शनसच्चिदानंद का अर्थ क्या हैसच्चिदानंद = सत् (शाश्वत अस्तित्व) + चित् (शुद्ध चेतना/ज्ञान) + आनंद (परम सुख)। यह ब्रह्म और आत्मा का स्वरूप है। तैत्तिरीय उपनिषद — 'सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म'। सरल अर्थ: मैं हूं + मैं जानता हूं + मैं आनंदित हूं = आत्मा का मूल स्वभाव।#सच्चिदानंद#ब्रह्म#वेदांत