अहिंसा परमो धर्मः का पूरा श्लोक और अर्थ क्या?
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पूरा श्लोक: 'अहिंसा परमो धर्मः, धर्म हिंसा तथैव च।' अर्थ: अहिंसा परम धर्म है, पर धर्म-रक्षा हेतु हिंसा भी धर्म ही है। अक्सर अधूरा उद्धृत किया जाता है। महाभारत (अनुशासन पर्व) में वर्णित।
- 1अहिंसा सर्वोपरि — सामान्य स्थिति में अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है। किसी जीव को अकारण कष्ट नहीं देना चाहिए।
- 2'धर्म हिंसा तथैव च' — जब धर्म की रक्षा, निर्दोषों की रक्षा या न्याय के लिए हिंसा आवश्यक हो, तो वह हिंसा भी धर्म ही है। इसीलिए गीता में कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध करने का आदेश दिया — अधर्म के विरुद्ध लड़ना क्षत्रिय का धर्म है।
- 3संतुलित दृष्टिकोण — हिंदू धर्म न तो पूर्ण अहिंसावादी है (जैन धर्म की तरह), न पूर्ण हिंसा समर्थक। यह संदर्भ-आधारित (contextual) दृष्टिकोण है।
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