गरुड़ पुराण: अकाल मृत्यु = प्रेत योनि (शेष आयु तक भटकना), अधूरी इच्छाएँ। मुक्ति: चतुर्दशी श्राद्ध, नारायण बलि, गया पिंडदान, गरुड़ पुराण पाठ।
- 1प्रेत योनि: अकाल मृत्यु = आत्मा को निर्धारित आयु शेष रहती है — वह प्रेत योनि में भटकती है जब तक वास्तविक मृत्यु समय न आ जाए।
- 2अधूरी इच्छाएँ: मृत्यु समय जो इच्छाएँ/मोह अधूरे — आत्मा उनके कारण भटकती है।
- 3संस्कार अभाव: अचानक मृत्यु = विधिवत अंतिम संस्कार कठिन — इससे आत्मा को गति नहीं मिलती।
- 4कष्टकारी: ऐसी आत्माएँ कभी-कभी परिवार/स्थान से जुड़ी रहती हैं।