अमरनाथ: प्राकृतिक हिम शिवलिंग, शिव ने पार्वती को अमर कथा सुनाई। यात्रा: संकल्प, ब्रह्मचर्य, निरंतर जप। गुफा में: दर्शन + प्रार्थना + प्रसाद अर्पण। श्रावण पूर्णिमा सर्वाधिक शुभ (पूर्ण आकार)। चंद्र कलाओं से बढ़ता-घटता है। साथ पार्वती-गणेश हिम संरचनाएं भी। दर्शन से मोक्ष प्राप्ति का विधान।
- 1संकल्प और मानसिक शुद्धि — यात्रा भक्तिभाव से करें, पर्यटन मात्र न मानें
- 2ब्रह्मचर्य पालन, सात्विक आहार
- 3शारीरिक फिटनेस — ऊंचाई पर कठिन यात्रा है
- 4'बम बम भोले', 'ॐ नमः शिवाय', 'हर हर महादेव' का निरंतर जप
- 5मार्ग में पड़ने वाले तीर्थ स्थलों (शेषनाग, पंचतरणी) में स्नान/पूजन
- 6हिम शिवलिंग के दर्शन (स्पर्श सामान्यतः निषिद्ध — प्राकृतिक संरचना की रक्षा हेतु)
- 7गुफा में प्रवेश से पूर्व 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जप
- 8हिम शिवलिंग के सम्मुख प्रार्थना और मनोकामना
- 9श्रद्धालु प्रसाद (फूल, बिल्वपत्र, मेवा) अर्पित करते हैं
- 10दीप-धूप अर्पित करें (जहां अनुमति हो)
- 11श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के दिन हिम शिवलिंग पूर्ण आकार में होता है — यह सर्वाधिक शुभ दिन माना गया है
- 12आषाढ़ पूर्णिमा से श्रावण पूर्णिमा तक यात्रा काल होता है
- 13हिम शिवलिंग के साथ दो अन्य हिम संरचनाएं भी बनती हैं — माता पार्वती और श्रीगणेश के प्रतीक
- 14यह शिवलिंग चंद्रमा की कलाओं के साथ बढ़ता-घटता है