ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
चेकलिस्ट

अमावस्या पर तर्पण करने का क्या विशेष महत्व है?

की चेकलिस्ट

अमावस्या तर्पण: पितृ तिथि (आत्मा निकट), चन्द्र अनुपस्थित (पितर काल), दर्शश्राद्ध (नित्य कर्तव्य), मासिक। सर्वपितृ अमावस्या=सर्वाधिक। सोमवती/भौमवती=विशेष। दक्षिण मुख→तिल-जौ-कुश→तर्पण।

  1. 1पितृ तिथि: अमावस्या = पितरों का दिन। इस दिन पितरों की आत्मा पृथ्वी के निकट आती है (मान्यता)। तर्पण = सीधे पितरों तक पहुँचता है।
  2. 2चन्द्रमा अनुपस्थित: अमावस्या = चन्द्रमा नहीं = अंधकार। पितर = अंधकार/दक्षिण/यम से सम्बद्ध। अंधकार की रात = पितरों का काल।
  3. 3दर्शामावस्या: दर्श = दर्शन। अमावस्या पर तर्पण = पितरों को 'दर्शन' (तृप्ति) देना।
  4. 4मासिक तर्पण: प्रत्येक अमावस्या पर तर्पण = 'दर्शश्राद्ध' = नित्य कर्तव्य (उपनीत द्विज)।
  5. 5सर्वपितृ अमावस्या (आश्विन): पितृ पक्ष की अमावस्या = सर्वाधिक पुण्यदायी। सभी पितरों का सामूहिक तर्पण।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें

मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।

श्रेणी
श्राद्ध-पितृ कर्म

इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।