अमावस्या = पितरों का दिन, पितृलोक का द्वार खुला। सर्वपितृ अमावस्या (पितृपक्ष अन्तिम) सर्वाधिक महत्वपूर्ण — सभी पितरों का एक साथ श्राद्ध, तिथि अज्ञात हो तो भी मान्य। मासिक अमावस्या पर तर्पण शुभ। पितृ दोष मुक्ति, सन्तान सुख, सद्गति प्राप्ति। तिल-जल तर्पण + पिण्डदान + ब्राह्मण भोजन।
- 1यदि मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो इस दिन श्राद्ध करने से सभी पितर तृप्त होते हैं।
- 2यह सभी पितरों (माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी सहित) के लिए एक साथ श्राद्ध करने की तिथि है।
- 3जिन पितरों का श्राद्ध पितृपक्ष में किसी कारणवश छूट गया हो, उनका भी इस दिन किया जा सकता है।
- 4सोमवती अमावस्या (सोमवार को अमावस्या)
- 5शनिश्चरी अमावस्या (शनिवार को अमावस्या)
- 6अमावस्या श्राद्ध से पितृ दोष, पितृ शाप से मुक्ति।
- 7वंश वृद्धि और सन्तान सुख।
- 8पितरों की आत्मा को शान्ति और सद्गति।
- 9घर में सुख-समृद्धि और अशान्ति निवारण।