असतो मा सद्गमय मंत्र का अर्थ क्या है
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बृहदारण्यक 1.3.28: असत् (मिथ्या) → सत् (सत्य); तमस् (अज्ञान) → ज्योति (ज्ञान); मृत्यु → अमृत (मोक्ष)। तीनों = एक ही प्रार्थना — संसार बंधन से मुक्ति। तीन शांति = तीन प्रकार के दुःख (आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक) की शांति।
- 1असतो मा सद्गमय — असत् (अनित्य/असत्य/मिथ्या) से मुझे सत् (सत्य/शाश्वत) की ओर ले चलो।
- 2तमसो मा ज्योतिर्गमय — तमस् (अंधकार/अज्ञान) से मुझे ज्योति (प्रकाश/ज्ञान) की ओर ले चलो।
- 3मृत्योर्मा अमृतं गमय — मृत्यु (नाशवान/मरणधर्मा) से मुझे अमृत (अमरत्व/मोक्ष) की ओर ले चलो।
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