का सरल उत्तर
बृहदारण्यक 1.3.28: असत् (मिथ्या) → सत् (सत्य); तमस् (अज्ञान) → ज्योति (ज्ञान); मृत्यु → अमृत (मोक्ष)। तीनों = एक ही प्रार्थना — संसार बंधन से मुक्ति। तीन शांति = तीन प्रकार के दुःख (आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक) की शांति।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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