अश्वत्थामा चिरंजीवी हैं — परंतु शाप से, वरदान से नहीं। सोते पांचालों की हत्या और गर्भस्थ परीक्षित पर ब्रह्मास्त्र के दंडस्वरूप कृष्ण ने मणि छीनी और शाप दिया — रोग, दुर्गंध, एकाकीपन में अनंत काल तक भटकना। 'आज कहाँ' — लोक मान्यता; शास्त्रीय रूप से अनिश्चित।
- 1सौप्तिक पर्व — युद्ध के अंतिम दिन (18वें) के बाद रात्रि में अश्वत्थामा ने सोते हुए पांचाल सैनिकों और द्रौपदी के पांचों पुत्रों की हत्या कर दी। यह महाभारत का सबसे क्रूर और अधर्मी कृत्य माना जाता है।
- 2ब्रह्मास्त्र — पकड़े जाने पर अश्वत्थामा ने पांडवों के वंश को नष्ट करने के लिए गर्भ में पल रहे अभिमन्यु पुत्र (परीक्षित) पर ब्रह्मास्त्र चलाया।
- 3कृष्ण का हस्तक्षेप — कृष्ण ने परीक्षित की रक्षा की (मृत शिशु को जीवित किया)।
- 4मणि और शाप:
- 5भटकते हुए — शाप अनुसार वे घने जंगलों, निर्जन स्थानों पर दुःख और पीड़ा में भटक रहे हैं।
- 6लोक कथाएं — भारत के विभिन्न भागों (नर्मदा किनारे, बुरहानपुर, असीरगढ़ किला) में अश्वत्थामा दर्शन की लोक कथाएं प्रचलित हैं। ये अप्रमाणित लोक मान्यताएं हैं।