भागवत पुराण का मुख्य संदेश: अनन्य भक्ति = मोक्ष का सरलतम मार्ग। नवधा भक्ति (7.5.23), कृष्ण लीला (10वां स्कंध), प्रह्लाद की भक्ति शक्ति, अजामिल की नाम-मुक्ति। सार: किसी भी समय, किसी भी स्थिति में भगवन्नाम = मुक्ति। 12 स्कंध, 18,000 श्लोक।
- 1भक्ति सर्वोपरि — भागवत का मूल संदेश है कि ईश्वर (कृष्ण/विष्णु) के प्रति अनन्य भक्ति ही मोक्ष का सरलतम और श्रेष्ठतम मार्ग है। 'श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम्...' (7.5.23 — नवधा भक्ति)।
- 2भगवान सब में, सब भगवान में — 'ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति' — भगवान सभी प्राणियों में हैं।
- 3माया से मुक्ति — संसार माया है; भक्ति से माया पार होती है।
- 4कृष्ण लीला — दशम स्कंध (10वां) में कृष्ण जन्म, बाल लीला, गोपी प्रेम, रास लीला, महाभारत — सब का वर्णन। यह सबसे लोकप्रिय भाग है।
- 5प्रह्लाद — भक्ति की शक्ति (7वां स्कंध) — बालक प्रह्लाद की अटूट भक्ति ने नरसिंह अवतार प्रकट किया।
- 6परीक्षित — मृत्यु भय से मुक्ति — 7 दिन में मृत्यु जानकर राजा ने भागवत श्रवण से मोक्ष प्राप्त किया — यह संदेश है कि भक्ति किसी भी समय प्रारंभ हो सकती है।
- 7अजामिल कथा (6.1-3) — महापापी भी अंतिम क्षण में भगवन्नाम से मुक्त हो सकता है।