भैरवी देवी की उपासना कैसे करें और किस उद्देश्य से?
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भैरवी = छठी महाविद्या, तपस्या की देवी, कुण्डलिनी का जागृत रूप। उद्देश्य: तपस्या शक्ति, कुण्डलिनी, शत्रु नाश, वाक् सिद्धि, ज्ञान। मंत्र: 'ॐ ह्रीं भैरव्यै नमः' 108 बार। लाल पुष्प/चंदन। अन्य उग्र महाविद्याओं से अपेक्षाकृत सौम्य — सामान्य भक्ति सभी कर सकते हैं। तांत्रिक = गुरु दीक्षा।
- 1तपस्या शक्ति: भैरवी तपस्या की अधिष्ठात्री — साधना में दृढ़ता।
- 2कुण्डलिनी जागरण: भैरवी = कुण्डलिनी शक्ति का जागृत रूप।
- 3शत्रु नाश और भय निवारण।
- 4वाक् सिद्धि: वाणी में शक्ति और प्रभाव।
- 5ज्ञान और विवेक: आत्मज्ञान प्राप्ति।
- 6रोग निवारण: विशेषकर अग्नि तत्व संबंधी रोग।
- 7'ॐ ह्रीं भैरव्यै नमः' — 108 बार जप।
- 8लाल पुष्प, लाल चंदन, कुमकुम अर्पित करें।
- 9नवरात्रि, अष्टमी पर विशेष पूजा।
- 10त्रिपुरभैरवी स्तोत्र का पाठ।
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श्रेणी
दस महाविद्या
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