विस्तृत उत्तर
भैरवी दस महाविद्याओं में छठी महाविद्या हैं। ये त्रिपुरभैरवी के नाम से प्रसिद्ध हैं और तपस्या, साधना और शक्ति की देवी मानी गई हैं।
भैरवी का स्वरूप
- ▸लाल वस्त्र, लाल रंग, त्रिनेत्रा, चार भुजाएं।
- ▸अभय मुद्रा और वर मुद्रा।
- ▸तेजस्वी और दीप्तिमान।
- ▸भैरव (शिव) की शक्ति।
उपासना का उद्देश्य
- 1तपस्या शक्ति: भैरवी तपस्या की अधिष्ठात्री — साधना में दृढ़ता।
- 2कुण्डलिनी जागरण: भैरवी = कुण्डलिनी शक्ति का जागृत रूप।
- 3शत्रु नाश और भय निवारण।
- 4वाक् सिद्धि: वाणी में शक्ति और प्रभाव।
- 5ज्ञान और विवेक: आत्मज्ञान प्राप्ति।
- 6रोग निवारण: विशेषकर अग्नि तत्व संबंधी रोग।
सामान्य उपासना
- 1'ॐ ह्रीं भैरव्यै नमः' — 108 बार जप।
- 2लाल पुष्प, लाल चंदन, कुमकुम अर्पित करें।
- 3नवरात्रि, अष्टमी पर विशेष पूजा।
- 4त्रिपुरभैरवी स्तोत्र का पाठ।
तांत्रिक साधना: गुरु दीक्षा अनिवार्य — भैरवी चक्र, भैरवी विद्या अत्यंत गोपनीय।
ध्यान रखें: भैरवी अन्य उग्र महाविद्याओं की तुलना में अपेक्षाकृत सौम्य मानी गई हैं — सामान्य भक्ति पूजा सभी कर सकते हैं।





