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दस महाविद्या📜 तंत्रसार, दस महाविद्या ग्रंथ, शाक्त परंपरा2 मिनट पठन

भैरवी देवी की उपासना कैसे करें और किस उद्देश्य से?

संक्षिप्त उत्तर

भैरवी = छठी महाविद्या, तपस्या की देवी, कुण्डलिनी का जागृत रूप। उद्देश्य: तपस्या शक्ति, कुण्डलिनी, शत्रु नाश, वाक् सिद्धि, ज्ञान। मंत्र: 'ॐ ह्रीं भैरव्यै नमः' 108 बार। लाल पुष्प/चंदन। अन्य उग्र महाविद्याओं से अपेक्षाकृत सौम्य — सामान्य भक्ति सभी कर सकते हैं। तांत्रिक = गुरु दीक्षा।

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विस्तृत उत्तर

भैरवी दस महाविद्याओं में छठी महाविद्या हैं। ये त्रिपुरभैरवी के नाम से प्रसिद्ध हैं और तपस्या, साधना और शक्ति की देवी मानी गई हैं।

भैरवी का स्वरूप

  • लाल वस्त्र, लाल रंग, त्रिनेत्रा, चार भुजाएं।
  • अभय मुद्रा और वर मुद्रा।
  • तेजस्वी और दीप्तिमान।
  • भैरव (शिव) की शक्ति।

उपासना का उद्देश्य

  1. 1तपस्या शक्ति: भैरवी तपस्या की अधिष्ठात्री — साधना में दृढ़ता।
  2. 2कुण्डलिनी जागरण: भैरवी = कुण्डलिनी शक्ति का जागृत रूप।
  3. 3शत्रु नाश और भय निवारण।
  4. 4वाक् सिद्धि: वाणी में शक्ति और प्रभाव।
  5. 5ज्ञान और विवेक: आत्मज्ञान प्राप्ति।
  6. 6रोग निवारण: विशेषकर अग्नि तत्व संबंधी रोग।

सामान्य उपासना

  1. 1'ॐ ह्रीं भैरव्यै नमः' — 108 बार जप।
  2. 2लाल पुष्प, लाल चंदन, कुमकुम अर्पित करें।
  3. 3नवरात्रि, अष्टमी पर विशेष पूजा।
  4. 4त्रिपुरभैरवी स्तोत्र का पाठ।

तांत्रिक साधना: गुरु दीक्षा अनिवार्य — भैरवी चक्र, भैरवी विद्या अत्यंत गोपनीय।

ध्यान रखें: भैरवी अन्य उग्र महाविद्याओं की तुलना में अपेक्षाकृत सौम्य मानी गई हैं — सामान्य भक्ति पूजा सभी कर सकते हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्रसार, दस महाविद्या ग्रंथ, शाक्त परंपरा
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