बिना मूर्ति: ध्यान, मंत्र जप (ॐ/गायत्री), हवन, सूर्य अर्घ्य, गीता पाठ, ॐ चिह्न, दीपक। गीता (12.3-4): निराकार उपासना मान्य। गीता (12.5): कठिन है, मूर्ति सहायक पर अनिवार्य नहीं। भाव प्रधान।
- 1ध्यान (Meditation) — आँखें बंद कर ईश्वर का चिंतन। सबसे उत्तम।
- 2मंत्र जप — ॐ, गायत्री, 'ॐ नमः शिवाय' — बिना मूर्ति, कहीं भी।
- 3हवन/यज्ञ — अग्नि में आहुति = वैदिक पूजा (मूर्ति नहीं)।
- 4प्रकृति पूजा — सूर्य अर्घ्य, तुलसी पूजा, नदी/पर्वत पूजा।
- 5शालिग्राम/शिवलिंग — ये मूर्ति नहीं, प्रतीक हैं।
- 6पवित्र ग्रंथ — गीता/रामायण का पाठ = ईश्वर उपासना।
- 7ॐ चिह्न — ॐ = ब्रह्म का प्रतीक। ॐ के सामने बैठकर ध्यान।
- 8दीपक — दीपक जलाना = ज्ञान का प्रतीक, मूर्ति आवश्यक नहीं।