ब्रह्मयज्ञ क्या है और कैसे करें
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ब्रह्मयज्ञ = वेद/शास्त्र का अध्ययन-अध्यापन। पंच महायज्ञों में प्रथम। ऋषि ऋण मुक्ति हेतु। विधि: संध्या के बाद वेद शाखा का पाठ, गायत्री जप, ऋषि तर्पण। सरल रूप: प्रतिदिन गीता/उपनिषद् का कुछ अंश पढ़ना-मनन करना। मनुस्मृति, तैत्तिरीय आरण्यक में विधान।
- 1ब्रह्मयज्ञ (ऋषि यज्ञ)
- 2देवयज्ञ (अग्निहोत्र/हवन)
- 3पितृयज्ञ (श्राद्ध/तर्पण)
- 4भूतयज्ञ/वैश्वदेवयज्ञ (बलिवैश्वदेव — प्राणियों को भोजन)
- 5अतिथि यज्ञ/मनुष्ययज्ञ (अतिथि सत्कार)
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