छिन्नमस्ता साधना क्या है?
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छिन्नमस्ता = स्वयं-छिन्न-सिर देवी = अहंकार-विसर्जन का प्रतीक। तीन रक्त-धाराएं = इड़ा-पिंगला-सुषुम्ना। मंत्र: 'श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचनीये...' — गुरु-दत्त। लाल वस्त्र, मंगलवार-अमावस्या। फल: कुण्डलिनी-जागरण, अहंकार-नाश, शक्ति-संचय। अत्यंत उग्र — सामान्य साधक के लिए नहीं।
- 1गुरु-दत्त और दीक्षा के बाद ही।
- 2मंगलवार, अमावस्या
- 3अर्धरात्रि
- 4कुण्डलिनी-जागरण — सर्वोच्च
- 5अहंकार का पूर्ण विसर्जन
- 6असाधारण शारीरिक और मानसिक शक्ति
- 7शत्रु-नाश और रक्षा
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श्रेणी
तंत्र साधना
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