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सरल उत्तर

छिन्नमस्ता साधना क्या है?

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छिन्नमस्ता = स्वयं-छिन्न-सिर देवी = अहंकार-विसर्जन का प्रतीक। तीन रक्त-धाराएं = इड़ा-पिंगला-सुषुम्ना। मंत्र: 'श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचनीये...' — गुरु-दत्त। लाल वस्त्र, मंगलवार-अमावस्या। फल: कुण्डलिनी-जागरण, अहंकार-नाश, शक्ति-संचय। अत्यंत उग्र — सामान्य साधक के लिए नहीं।

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