1कर्म सिद्धांत: ग्रह दोष = अशुभ कर्म फल। दान = शुभ कर्म → अशुभ कर्म संतुलित → ग्रह प्रभाव कम।
2ग्रह-दान संबंध: प्रत्येक ग्रह = विशिष्ट वस्तु/व्यक्ति। उस वस्तु/व्यक्ति को दान = ग्रह ऊर्जा संतुलित। (शनि = गरीब/लोहा, गुरु = विद्वान/पुस्तक, सूर्य = गेहूँ/पिता)।
3अहंकार त्याग: दान = 'मेरा' छोड़ना = अहंकार कम = आध्यात्मिक शुद्धि = ग्रह अनुकूल।