देव दीपावली पर काशी में दीपदान का क्या विधान है
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काशी देव दीपावली: कार्तिक पूर्णिमा। प्रातः गंगा स्नान → शिव पूजा (त्रिपुरारि) → सन्ध्या में 84 घाटों पर लाखों दीये → दशाश्वमेध घाट महा गंगा आरती → गंगा में दीये प्रवाहित → रात्रि जागरण। स्कन्द पुराण: दीपदान = सर्वपापनाश। शिव का त्रिपुरासुर वध उपलक्ष्य।
- 1सूर्यास्त के बाद काशी के सभी 84 घाटों पर लाखों मिट्टी के दीये प्रज्वलित।
- 2घाटों की सीढ़ियों पर, मन्दिरों में, नावों पर, गंगा में दीये प्रवाहित।
- 3प्रत्येक दीये में सरसों/तिल तेल या घी।
- 4दीये जलाते समय मंत्र: 'दीपज्योतिः परं ब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं सन्ध्यादीपं नमोऽस्तु ते॥'
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