देव दीपावली पर काशी में दीपदान का क्या विधान है
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काशी देव दीपावली: कार्तिक पूर्णिमा। प्रातः गंगा स्नान → शिव पूजा (त्रिपुरारि) → सन्ध्या में 84 घाटों पर लाखों दीये → दशाश्वमेध घाट महा गंगा आरती → गंगा में दीये प्रवाहित → रात्रि जागरण। स्कन्द पुराण: दीपदान = सर्वपापनाश। शिव का त्रिपुरासुर वध उपलक्ष्य।
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