देवी श्रृंगार = षोडशोपचार अंग। नई शुद्ध सामग्री, शुद्ध हाथ, मंत्र सहित। दुर्गा/काली = लाल प्रधान। सरस्वती = श्वेत/पीला। सिंदूर, कुमकुम, बिंदी, चुनरी, पुष्प माला। भक्तिभाव से। नवरात्रि: पूर्ण सोलह श्रृंगार। शुक्रवार विशेष।
- 1लाल/केसरी चुनरी या वस्त्र
- 2सिंदूर, कुमकुम, रोली
- 3बिंदी/टीका
- 4काजल
- 5मेहंदी (नवरात्रि में)
- 6चूड़ियां (लाल/हरी)
- 7फूलों की माला
- 8इत्र/सुगंध
- 9श्रृंगार का सम्पूर्ण सामान (सोलह श्रृंगार)
- 10श्रृंगार सामग्री नई और शुद्ध होनी चाहिए — पुरानी/उपयोग की हुई न हो।
- 11स्वयं स्नान करके, शुद्ध हाथों से श्रृंगार करें।
- 12देवी को श्रृंगार करते समय मंत्र जप करें — 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' या 'ॐ दुं दुर्गायै नमः'।
- 13लाल रंग प्रधान — दुर्गा, काली, लक्ष्मी को।
- 14सफेद/पीला — सरस्वती को।
- 15श्रृंगार भक्तिभाव से करें — यह देवी की सेवा है।
- 16जूठे हाथ या अशुद्ध अवस्था में श्रृंगार न करें।
- 17श्रृंगार प्रतिदिन करना श्रेष्ठ — कम से कम सिंदूर/कुमकुम और पुष्प अवश्य।
- 18नवरात्रि में प्रतिदिन पूर्ण सोलह श्रृंगार।
- 19शुक्रवार को श्रृंगार विशेष फलदायी।
- 20मंगलवार (दुर्गा), शुक्रवार (लक्ष्मी), बुधवार (गणेश माता)।