लक्षण: जप में अलौकिक आनंद, अजपा जप (स्वतः गूंजना), स्वप्न में देवी दर्शन, शरीर में रोमांच/कंपन, जीवन में सकारात्मक बदलाव, मानसिक शांति-निर्भयता, अंतर्ज्ञान वृद्धि, दिव्य सुगंध/प्रकाश। सावधानी: गोपनीय रखें, अहंकार न करें, गुरु से पुष्टि करें, भ्रम से बचें।
- 1जप के समय शरीर में कंपन या रोमांच।
- 2ललाट या हृदय में ऊष्मा/स्पंदन।
- 3शरीर में हल्कापन।
- 4जीवन में अचानक सकारात्मक परिवर्तन।
- 5बाधाओं का स्वतः हटना।
- 6इच्छाओं की पूर्ति होने लगना।
- 7लोगों का आकर्षण बढ़ना।
- 8मन में असाधारण शांति और निर्भयता।
- 9अंतर्ज्ञान (intuition) बढ़ना।
- 10सही-गलत का स्पष्ट बोध।
- 11मंत्र सिद्धि के लक्षण व्यक्तिगत अनुभव हैं — इन्हें दूसरों को बताना निषिद्ध है (गोपनीयता)।
- 12स्वयं को सिद्ध मानकर अहंकार न करें — यह सबसे बड़ा दोष।
- 13गुरु से पुष्टि करवाएं।
- 14हर असामान्य अनुभव को मंत्र सिद्धि न समझें — भ्रम से बचें।