ध्यान के दौरान आंखें बंद क्यों रखते हैं?
की चेकलिस्ट
ध्यान में आँखें बंद इसलिए रखते हैं क्योंकि यह 'प्रत्याहार' (योगसूत्र 2/54) है — इंद्रियों को बाहर से भीतर मोड़ना। गीता (5/27) में दृष्टि को भ्रूमध्य में स्थिर करने का आदेश है। खुली आँखें मन को बाहर खींचती हैं; बंद आँखें मन को अंतर्मुख बनाती हैं।
- 1आँखें मन की सबसे शक्तिशाली इंद्रिय हैं — मन को बाहर खींचने में सबसे अधिक सक्षम
- 2खुली आँखों से मन 80% बाहरी दृश्यों में उलझ जाता है
- 3बंद आँखों से मन स्वाभाविक रूप से अंतर्मुख होता है
- 4बाहरी विषयों को बाहर ही रोककर, दृष्टि को भ्रूमध्य में स्थिर करके, प्राण-अपान को नासिका में सम करके ध्यान करें।
- 5आँखें अर्ध-मुद्रित रखें, दृष्टि नासिकाग्र पर टिकाएं।
- 6बाहरी विक्षेप शून्य होते हैं
- 7भीतर का प्रकाश, रंग, दृश्य अनुभव होने लगते हैं
- 8आज्ञाचक्र (भ्रूमध्य) पर ध्यान केंद्रित करना सरल होता है
- 9मन को अंतर्मुख करने में सहायता मिलती है
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ध्यान साधना
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