विस्तृत उत्तर
## ध्यान के दौरान आंखें बंद क्यों रखते हैं?
मूल कारण — प्रत्याहार
पतंजलि के अष्टांग योग में 'प्रत्याहार' (5वाँ अंग) का अर्थ है — इंद्रियों को बाहरी विषयों से हटाकर भीतर मोड़ना। आँखें बंद करना प्रत्याहार की सबसे सरल और प्रभावी क्रिया है।
आँखें और मन का सम्बन्ध
- ▸आँखें मन की सबसे शक्तिशाली इंद्रिय हैं — मन को बाहर खींचने में सबसे अधिक सक्षम
- ▸खुली आँखों से मन 80% बाहरी दृश्यों में उलझ जाता है
- ▸बंद आँखों से मन स्वाभाविक रूप से अंतर्मुख होता है
शास्त्र-प्रमाण
गीता (5/27)
*'स्पर्शान् कृत्वा बहिर्बाह्यांश्चक्षुश्चैवान्तरे भ्रुवोः।
प्राणापानौ समौ कृत्वा नासाभ्यन्तरचारिणौ।।'*
— बाहरी विषयों को बाहर ही रोककर, दृष्टि को भ्रूमध्य में स्थिर करके, प्राण-अपान को नासिका में सम करके ध्यान करें।
श्वेताश्वतर (2/9)
*'समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः।
सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं।'*
— आँखें अर्ध-मुद्रित रखें, दृष्टि नासिकाग्र पर टिकाएं।
अपवाद — त्राटक
त्राटक ध्यान में आँखें खुली रखकर दीपशिखा या बिंदु पर एकाग्रता की जाती है — यह दृष्टि-साधना का विशेष रूप है।
व्यावहारिक लाभ
- ▸बाहरी विक्षेप शून्य होते हैं
- ▸भीतर का प्रकाश, रंग, दृश्य अनुभव होने लगते हैं
- ▸आज्ञाचक्र (भ्रूमध्य) पर ध्यान केंद्रित करना सरल होता है
- ▸मन को अंतर्मुख करने में सहायता मिलती है




