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चेकलिस्ट

ध्यान में अहंकार का विलय कैसे होता है?

की चेकलिस्ट

रमण: 'मैं कौन?' → खोजो → मिलता नहीं → विलय। साक्षी ('मैं=विचार/शरीर नहीं'), समर्पण ('तेरी इच्छा'), सेवा, निर्विकल्प। कबीर: 'जब मैं था तब हरि नहीं।' 'अहंकार विलय=मोक्ष।'

  1. 1'मैं कौन?' (रमण महर्षि): 'मैं कौन हूं?' = आत्मविचार → 'मैं' खोजो → मिलता नहीं → 'मैं' = विलय → आत्मा = शेष।
  2. 2साक्षी ध्यान: विचार = देखो (participate मत) → 'मैं = विचार नहीं' → 'मैं = शरीर नहीं' → 'मैं = कुछ नहीं' → विलय।
  3. 3समर्पण: 'मेरी इच्छा नहीं, तेरी इच्छा' → अहंकार = समर्पित → विलय।
  4. 4सेवा: निःस्वार्थ सेवा = 'मैं' ↓ → अहंकार ↓।
  5. 5निर्विकल्प: निर्विकल्प समाधि = अहंकार = शून्य (पतंजलि 1.3)।
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