का सरल उत्तर
रमण: 'मैं कौन?' → खोजो → मिलता नहीं → विलय। साक्षी ('मैं=विचार/शरीर नहीं'), समर्पण ('तेरी इच्छा'), सेवा, निर्विकल्प। कबीर: 'जब मैं था तब हरि नहीं।' 'अहंकार विलय=मोक्ष।'
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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