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ध्यान में शून्य अवस्था का क्या अर्थ है?

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विचार/इंद्रिय/अहंकार शून्य = शुद्ध चेतना। पतंजलि: 'चित्तवृत्तिनिरोध'। तुरीय (4वीं अवस्था)। शून्य = पूर्ण (ब्रह्म)। समाधि द्वार। नींद नहीं — जागरूक+शून्य = सच्चा।

  1. 1निर्विचार: विचार बंद = शून्य = ध्यान सफल।
  2. 2तुरीय: जाग्रत/स्वप्न/सुषुप्ति से परे = चौथी अवस्था = शून्य।
  3. 3ब्रह्म: शून्य = शून्य नहीं — पूर्ण = ब्रह्म = 'पूर्णमदः पूर्णमिदम्'।
  4. 4समाधि: शून्य = सविकल्प/निर्विकल्प समाधि का द्वार।
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