का सरल उत्तर
विचार/इंद्रिय/अहंकार शून्य = शुद्ध चेतना। पतंजलि: 'चित्तवृत्तिनिरोध'। तुरीय (4वीं अवस्था)। शून्य = पूर्ण (ब्रह्म)। समाधि द्वार। नींद नहीं — जागरूक+शून्य = सच्चा।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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