मन शांत→अंतर्ध्वनि, आज्ञा→तीसरी आंख, पतंजलि (3.33): 'प्रातिभ से सब जाना', अवचेतन accessible, ऊर्जा sensitivity। 'सही निर्णय स्वतः।' अंतर्ज्ञान≠कल्पना — विनम्रता+परीक्षा।
- 1मन शांत → संकेत सुनना: दैनिक = शोर (विचार)। ध्यान = शांत → अंतर्ध्वनि (intuition) सुनाई।
- 2आज्ञा चक्र: ध्यान → आज्ञा सक्रिय → तीसरी आंख → 'देखना' बिना आंखों = अंतर्ज्ञान।
- 3पतंजलि (3.33): 'प्रातिभात् वा सर्वम्' — 'प्रातिभ (अंतर्ज्ञान) से सब कुछ (जाना जा सकता है)।'
- 4अवचेतन: ध्यान → अवचेतन accessible → 'gut feeling' = trained → reliable।
- 5ऊर्जा sensitivity: ध्यानी = ऊर्जा अनुभव → लोगों/स्थानों की ऊर्जा 'पढ़ सकता है।'