न्याय माँग(चीरहरण प्रश्न), क्षमा≠कमजोरी(13 वर्ष+केश प्रतिज्ञा), बुद्धिमत्ता(5 पति गृहस्थ), भक्ति('हे गोविन्द!'=कृष्ण रक्षा), आत्मनिर्भरता(स्वयंवर)। अन्याय पर चुप न रहो।
- 1न्याय की माँग: चीरहरण में भरी सभा में प्रश्न पूछा — 'क्या युधिष्ठिर को मुझे दांव लगाने का अधिकार था?' अन्याय = चुप नहीं।
- 2क्षमा ≠ कमजोरी: 13 वर्ष अपमान सहा — पर भूली नहीं। 'मेरे केश खुले रहेंगे जब तक दुःशासन का रक्त न लगे।'
- 3बुद्धिमत्ता: 5 पतियों का गृहस्थ = अत्यंत कठिन — कुशलता से संभाला।
- 4भक्ति: संकट में कृष्ण पुकारा — 'हे गोविन्द!' = सच्ची भक्ति = ईश्वर रक्षा।
- 5आत्मनिर्भरता: स्वयंवर — स्वयं चुना (अर्जुन)।