चेकलिस्ट: दुर्गा पूजा में बोधन और अधिवास का क्या अर्थ
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दुर्गा पूजा में बोधन और अधिवास का क्या अर्थ है?
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बोधन = देवी जागरण/आवाहन (षष्ठी, बेल वृक्ष)। राम ने अकाल बोधन किया। अधिवास = प्राण प्रतिष्ठा (108 सामग्री अभिषेक)। क्रम: बोधन→अधिवास→सप्तमी-नवमी→विसर्जन।
1अर्थ: 'बोधन' = जागृत करना। देवी दुर्गा को जगाना/आवाहन।
2कब: महाषष्ठी (छठे दिन) — शारदीय नवरात्रि।
3विधि: बेल वृक्ष के नीचे देवी का आवाहन — 'हे देवी, जागृत हों, पृथ्वी पर पधारें।'
4राम संदर्भ: राम ने रावण वध हेतु शरद ऋतु में अकाल बोधन किया (सामान्यतः वसंत = देवी जागरण)।
5अर्थ: 'अधिवास' = निवास स्थापित करना। देवी का प्रतिमा/मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा।
6कब: बोधन के बाद, सप्तमी से पहले।
7विधि: 108 सामग्रियों से देवी मूर्ति का अभिषेक — दर्पण, शंख, पुष्प आदि।